क्या है ‘गुड फ्राइडे’ और क्यों मनाया जाता है!! – Interesting Facts, Information in Hindi


‘गुड फ्राइडे’, ईसाई धर्म के लोगों के बीच मनाया जाने वाला ऐसा त्यौहार है, जिसे ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाते हैं। प्रेम, ज्ञान व अहिंसा का संदेश देने वाले प्रभु यीशु को इस दिन सूली पर चढ़ा दिया गया था।

प्रभु यीशु ने ही ईसाई धर्म की स्थापना की थी। आइए जानते है, क्या है ‘गुड फ्राइडे’ और जिस दिन प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था, उस दिन को ‘गुड’ क्यों कहते हैं।


गुड फ्राइडे नाम क्यों पड़ा?

ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह, परमेश्वर के बेटे हैं। उन्‍हें अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए मृत्‍यु दंड की सज़ा दी गई।

कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए पिलातुस ने यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया और उनपर कई तरह से यातनाएं की गईं।

लेकिन यीशु उनके लिए प्रार्थना करते रहे कि ‘हे ईश्‍वर! इन्‍हें क्षमा करना, क्‍योंकि ये नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं’। ईसा मसीह ने लोगों की भलाई के लिए अपनी जान दी थी।

इसलिए इस दिन को ‘गुड’ कहकर संबोधित किया जाता है। जिस दिन ईसा मसीह को क्रॉस पर लटकाया गया था, उस दिन फ्राइडे यानी कि शुक्रवार था, तब से उस दिन को ‘गुड फ्राइडे’ कहा जाने लगा।

6 घंटे तक सूली पर लटके रहे थे प्रभु यीशु

बाइबिल में बताया गया है कि प्रभु यीशु को पूरे 6 घंटे तक सूली पर लटकाया गया था। बताया जाता है कि आखिरी के 3 घंटों में चारों ओर अंधेरा छा गया था।

जब यीशु के प्राण निकले, तो एक जलजला सा आया। कब्रों की कपाटें टूटकर खुल गईं। दिन में अंधेरा हो गया। माना जाता है कि इसी वजह से गुड फ्राइडे के दिन चर्च में दोपहर में करीब 3 बजे प्रार्थना सभाएं होती हैं। मगर किसी भी प्रकार का समारोह नहीं होता है।

तीन दिन बाद हो गए थे जीवित

ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन क्रॉस पर लटकाए जाने के तीसरे ही दिन रविवार को वह फिर से जीवित हो उठे थे। इसलिए पूरी दुनिया में रविवार को ‘ईस्‍टर संडे के रूप में मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे के कुछ और नाम

ईसाई समुदाय में गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है।

काले कपड़े पहनकर करते हैं शोक

ईसाई समुदाय के ज़्यादातर लोग इस दिन काले कपड़े पहनकर अपना शोक व्यक्त करते हैं। प्रभु यीशू से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। चर्च जाकर प्रभु यीशू से प्रार्थना करते हैं और उनके उपदेश को सुनते है।

इस दिन ईसाई समुदाय के लोग प्रसाद स्वरूप गर्म मीठी रोटियां भी खाते हैं। लोग चर्च में घंटे नहीं बजाते हैं, बल्कि एक विशेष प्रार्थना की जाती है और लकड़ी के खटखटे से आवाज़ की जाती है। साथ ही रात के समय कहीं-कहीं काले कपड़े पहनकर प्रभु यीशू की छवि को लेकर पद यात्रा निकालते हैं।

शांति दूत कहलाते थे प्रभु यीशु

यीशु ने लोगों को क्षमा, शांति, दया, करुणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार एवं पवित्र आचरण का उपदेश दिया। उनके इन्हीं सद्गुणों के कारण लोग उन्हें शांति दूत, क्षमा मूर्ति और महात्मा कहकर पुकारने लगे। आज के दिन ईसाई चर्च सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए चंदा व दान देते हैं।

यह भी पढ़ें :-

गुड फ्राइडे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य




Source link

Leave a Comment

Share via
Copy link
Powered by Social Snap